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पाकिस्तान की बर्बादी का जड़ वहां की सेना और आईएसआई : एसपी वैद

श्रीनगर, 9 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों, भारत के बढ़ते रक्षा खर्च, ईरान-इजरायल तनाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल को लेकर अपनी राय रखी।
पाकिस्तान की बर्बादी का जड़ वहां की सेना और आईएसआई : एसपी वैद

श्रीनगर, 9 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों, भारत के बढ़ते रक्षा खर्च, ईरान-इजरायल तनाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल को लेकर अपनी राय रखी।

पीओजेके में पाकिस्तान के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर एसपी वैद ने आईएएनएस से कहा कि पाकिस्तान पिछले 75 वर्षों से दुनिया के सामने कश्मीर को लेकर झूठा नैरेटिव पेश करता रहा है। जिस क्षेत्र पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है, वहां के लोगों ने अब खुलकर बता दिया है कि वे पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते।

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर और पीओजेके के अंदर हो रहे प्रदर्शनों ने पाकिस्तान के दावों की पोल खोल दी है। जिन लोगों को पहले भारत विरोधी प्रदर्शन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, आज वही लोग पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।

पूर्व डीजीपी ने कहा कि पीओजेके के लोग कोई गलत मांग नहीं कर रहे हैं। वे सिर्फ अपने बुनियादी अधिकार चाहते हैं। वहां महंगाई चरम पर है, आटा और जरूरी सामान बेहद महंगे हो चुके हैं। लोगों को बेहतर अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने वर्षों में हजारों लोगों को गायब कर दिया और आम जनता को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता तक नहीं दी।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इंटरनेशनल एजेंसीज का दुरुपयोग करता है और फेक नैरेटिव चलाता है।

एसपी वैद ने कहा कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर है और वहां की सेना का दबदबा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब 20 वर्षों में पीओजेके में 10 प्रधानमंत्री बदले गए, जबकि भारत के जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकारों ने अपना कार्यकाल पूरा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोगों को यह समझना होगा कि उनकी समस्याओं और बर्बादी की जड़ वहां की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई है।

भारत के बढ़ते रक्षा खर्च पर भी पूर्व डीजीपी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार भारत का सैन्य खर्च 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और यह पाकिस्तान से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत की पहली प्राथमिकता आम लोगों का जीवन बेहतर बनाना है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इसी दिशा में काम कर रहे हैं।

एसपी वैद ने कहा कि वर्ष 2014 से मोदी सरकार का फोकस गरीबों को बुनियादी सुविधाएं देने और उनके जीवन स्तर को सुधारने पर रहा है। पिछले वर्षों में 30 से 40 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सामने पाकिस्तान जैसी कट्टरपंथी और अस्थिर सोच वाला पड़ोसी तथा चीन जैसा विस्तारवादी देश मौजूद है। ऐसे में देश की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए रक्षा खर्च बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी जिक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री के प्रयासों से भारत अब बड़ी संख्या में अपने हथियार खुद बना रहा है। आज लगभग 60 से 70 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही तैयार किए जा रहे हैं, जिससे लागत कम हुई है और भविष्य में और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना है।

ईरान-इजरायल तनाव और संभावित युद्धविराम पर बोलते हुए एसपी वैद ने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया के लिए राहत की बात होगी। उन्होंने कहा कि इससे समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहेगा और वैश्विक महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्धविराम को लेकर की गई बातें सच साबित हों और दोनों देशों में शांति स्थापित हो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे होने पर एसपी वैद ने कहा कि भारत का सौभाग्य है कि उसे मोदी जैसा नेतृत्व मिला। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीसरे स्थान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। करोड़ों लोगों का गरीबी से निकलना एक बड़ी उपलब्धि है।

हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री से एक अपील भी की। उन्होंने कहा कि केंद्र स्तर पर कामकाज में काफी सुधार हुआ है, लेकिन निचले स्तर की नौकरशाही में अभी भी औपनिवेशिक मानसिकता और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं मौजूद हैं। आम लोगों को सरकारी दफ्तरों में आज भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अगर इस व्यवस्था में और सुधार किया जाए तो देश के विकास को नई गति मिल सकती है।

--आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

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