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जनजाति संस्कृति समागम : मनोज तिवारी ने कहा, 'जनजातीय समुदाय भी देश की मुख्यधारा में शामिल'

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के सम्मान में लाल किला मैदान में 'जनजाति सुरक्षा मंच' द्वारा आयोजित 'जनजाति संस्कृति समागम' में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद मनोज तिवारी ने शिरकत की।
जनजाति संस्कृति समागम :  मनोज तिवारी ने कहा, 'जनजातीय समुदाय भी देश की मुख्यधारा में शामिल'

नई दिल्‍ली, 24 मई (आईएएनएस)। 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के सम्मान में लाल किला मैदान में 'जनजाति सुरक्षा मंच' द्वारा आयोजित 'जनजाति संस्कृति समागम' में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद मनोज तिवारी ने शिरकत की।

उन्‍होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "आज दिल्ली का लाल किला मैदान लोकतंत्र की पूर्णता का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यह भारत के लिए एक अवसर है। मैं यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति की ओर से एक प्रतिनिधि के रूप में खड़ा हूं।"

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, "यह हमारा सौभाग्य है। आज, भगवान बिरसा मुंडा के 150 वर्ष पूरे होने पर, दिल्ली में एक जनजातीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित देश के हर हिस्से से जनजातीय भाई-बहन आए हैं। वे देश की मुख्यधारा का हिस्सा हैं। दिल्ली उनकी भी है और हम उनके साथ बैठकर उनके बेहतर भविष्य की योजनाएं बनाना चाहते हैं।

इस समारोह में प्रतिभाग करने वाले लोगों ने आईएएनएस से अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान एक प्रतिभागी ने कहा क‍ि आज, जब यह जनजाति संस्कृति समागम आयोजित किया जा रहा है, तो हम पूरे दिल्ली से आए आदिवासी समुदायों की उपस्थिति देख रहे हैं।

उन्‍होंने कहा कि भारत में लगभग 750 आदिवासी समुदाय हैं, और यहां 550 से अधिक आदिवासी समाजों के लोग देखे जा सकते हैं। ऐसा लगता है मानो आज यहां एक 'लघु भारत' इकट्ठा हो गया हो। हम यहां विभिन्न आदिवासी समुदायों की अनूठी संस्कृतियों, परंपराओं, वेशभूषा, बोलियों, भाषाओं, वाद्ययंत्रों और जीवन-शैलियों को प्रदर्शित होते देख सकते हैं। जनजातीय समाज क्षेत्र के मुद्दों और मांगों को हमेशा उठाता रहता है।

एक अन्‍य प्रतिभागी ने बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक, पूरे देश भर से लोग इस आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने आए हैं। एक ही भावना से एकजुट होकर, हम 'भारत माता की जय' के एक ही संकल्प के साथ आए हैं।

वहीं, एक दूसरे प्रतिभागी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आज का दिन बहुत ही सौभाग्यशाली है, क्योंकि हमारे साथ कम से कम 50 महिलाओं की एक टीम आई है। जैसा कि आप देख सकते हैं, बाहर पानी वितरित किया जा रहा है। पहले हम खाली बैठे थे, तो हमने सोचा कि अपने मेहमानों का आतिथ्य-सत्कार कैसे किया जाए। तभी हमारे मन में विचार आया कि हमें मंदिर से लाए गए तिलक के साथ उनका स्वागत करना चाहिए और जब हमने उनका स्वागत किया, तो वे बहुत प्रसन्न हुए।

एक महिला ने कहा कि हमें यहां आकर बहुत अच्छा लगा और बहुत खुशी महसूस हो रही है। हम बाद में लाल किला जाएंगे, लेकिन हम यहां एक विशेष उद्देश्य के साथ आए हैं। हम यहां नई दिल्ली में आदिवासी समुदाय का समर्थन करने और उनकी सुरक्षा करने के लिए आए हैं, साथ ही उन मुद्दों को उठाने आए हैं, जिनका सामना वे कर रहे हैं।

एक प्रतिभागी ने कहा, "हम यहां जनजातीय समागम में शामिल होने और बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करने आए हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हमारे जनजातीय समुदायों को एकजुट करना और विभिन्न क्षेत्रों व भाषाओं के लोगों के साथ संवाद स्थापित करना है। यह अनुभव बेहद सुखद है। यहां व्यवस्थाएं भी बहुत अच्छी की गई हैं।

एक प्रतिभागी महिला उत्तराखंड के पारंपरिक पहनावे में पहुंची और कहा कि आज का दिन हमारे लिए बहुत सौभाग्यशाली है। महिला ने कहा कि पहले हम खाली बैठे थे, तो हमने सोचा कि अपने मेहमानों का सत्कार किया जाए। हमने उनका स्वागत किया। 'अतिथि देवो भव' की भावना से मेहमानों की सेवा करनी चाहिए। मैंने अपने जीवन में ऐसा कार्यक्रम नहीं देखा है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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