Samachar Nama
×

मजबूत एसआईपी निवेश और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुपए में कमजोरी की बड़ी वजह : जेफरीज

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कहा कि भारतीय रुपए में हाल की गिरावट में कच्चे तेल और चालू खाते घाटे से जुड़ी चिंताओं से अधिक लगातार मजबूत घरेलू निवेश एवं विदेशी निवेशकों की बिकवाली का अधिक योगदान है।
मजबूत एसआईपी निवेश और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुपए में कमजोरी की बड़ी वजह : जेफरीज

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कहा कि भारतीय रुपए में हाल की गिरावट में कच्चे तेल और चालू खाते घाटे से जुड़ी चिंताओं से अधिक लगातार मजबूत घरेलू निवेश एवं विदेशी निवेशकों की बिकवाली का अधिक योगदान है।

'आईएनआर प्रेशर-द डाउनसाइड ऑफ एसआईपी' नामक रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि इक्विटी बाजार में एसआईपी के जरिए मजबूत घरेलू निवेश और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से लगातार बिकवाली भारतीय रुपए में गिरावट की एक बड़ी वजह है।

जेफरीज ने अनुमान लगाया कि बीते दो वर्षों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 78 अरब डॉलर की निकासी की है। इस दौरान मजबूत घरेलू निवेश को देखते हुए फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई), प्राइवेट इक्विटी फर्म और फॉरेन प्रमोटर्स ने उच्च मूल्यांकन वाले भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी घटाई है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि एसआईपी, म्यूचुअल फंड और रिटायरमेंट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट के माध्यम से मजबूत घरेलू निवेश इनफ्लो ने भारी बिकवाली के दबाव के बावजूद विदेशी निवेशकों को आसानी से बाहर निकलने का रास्ता प्रदान किया।

रिपोर्ट के अनुसार, एफपीआई ने वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 21 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय शेयर बेचे और वित्त वर्ष 2027 में भी अब तक शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2024 से अकेले एफपीआई ने 44 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय शेयर बेचे हैं।

विदेशी निवेश में भारी उछाल के बावजूद, बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक अपेक्षाकृत स्थिर रहे क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों ने स्थिर एसआईपी निवेश और ईपीएफओ तथा एनपीएस से जुड़े निवेशों में बढ़ते आवंटन के माध्यम से बिकवाली को अवशोषित करना जारी रखा।

हालांकि, जेफरीज ने चेतावनी दी कि इस ट्रेंड ने भारत की पूंजी खाता स्थिति को कमजोर कर दिया है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 और 2026 के दौरान भारत का पूंजी खाता अधिशेष जीडीपी के लगभग 0.5 प्रतिशत तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है, जबकि पिछले दशक में औसत अधिशेष 2.6 प्रतिशत रहा था।

इसी समय, प्रमोटरों और निजी इक्विटी निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी की बिक्री के कारण, दो वर्षों की अवधि के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगभग 5 अरब डॉलर पर स्थिर रहा।

परिणामस्वरूप, भारत का भुगतान संतुलन पिछले दो वर्षों से नकारात्मक बना हुआ है, और जेफरीज को आने वाले वर्ष में भी कमजोरी की आशंका है।

हालांकि, ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि यदि विदेशी निवेशकों का विश्वास सुधरता है तो स्थिति में सुधार हो सकता है।

--आईएएनएस

एबीएस/

Share this story

Tags