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देवेंद्र झाझरिया: हादसे से बावजूद नहीं मानी हार, पैरालंपिक में भारत को जिताए 3 मेडल

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। देवेंद्र झाझरिया की गिनती भारत के सबसे सफल पैरा एथलीट्स में होती है, जिन्होंने जैवलिन थ्रो में भारत के लिए 3 पैरालंपिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। बचपन में दुर्घटना में एक हाथ गंवाने के बावजूद देवेंद्र ने हार नहीं मानी। उनकी उपलब्धियां संघर्ष, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट खेल भावना की प्रेरक मिसाल हैं।
देवेंद्र झाझरिया: हादसे से बावजूद नहीं मानी हार, पैरालंपिक में भारत को जिताए 3 मेडल

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। देवेंद्र झाझरिया की गिनती भारत के सबसे सफल पैरा एथलीट्स में होती है, जिन्होंने जैवलिन थ्रो में भारत के लिए 3 पैरालंपिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। बचपन में दुर्घटना में एक हाथ गंवाने के बावजूद देवेंद्र ने हार नहीं मानी। उनकी उपलब्धियां संघर्ष, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट खेल भावना की प्रेरक मिसाल हैं।

10 जून 1981 को राजस्थान के चुरू में जन्मे देवेंद्र बेहद उत्साही बच्चे थे, लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। एक पेड़ पर चढ़ते समय शाखा पर लिपटे बिजली के हाई वोल्टेज तार के संपर्क में आने के बाद ग्रामीणों ने देवेंद्र को पेड़ से उतारा। लोगों को ऐसा लगा कि वह मर गए हैं, लेकिन डॉक्टरों ने तुरंत बायां हाथ काटने की सलाह दी। उस समय देवेंद्र महज 8 साल के थे।

देवेंद्र समझ गए थे कि अब जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी। वह न तो दोस्तों से पहले की तरह मिलते-जुलते, न ही उनके साथ खेल पाते, क्योंकि दूसरे बच्चे उन्हें बोझ समझते थे।

देवेंद्र ने स्कूल में भाला फेंक प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू किया। साल 1997 में एक पैरा-एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कोच रिपुदमन सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए देवेंद्र को यह खेल गंभीरता से लेने की सलाह दी।

23 साल की उम्र में देवेंद्र झाझरिया ने 2004 एथेंस पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया, जिसमें 62.15 मीटर के वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ एफ46 भाला फेंक में गोल्ड जीता। अगले दो पैरालंपिक में एफ46 इवेंट कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थे। ऐसे में उन्हें अगले पैरालंपिक गेम्स में उतरने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

2016 रियो पैरालंपिक में देवेंद्र ने 63.97 मीटर के थ्रो के साथ अपना रिकॉर्ड बेहतर करते हुए भारत को दूसरा गोल्ड जिताया। इसी के साथ देवेंद्र पैरालंपिक में दो गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बन गए।

एक वक्त ऐसा भी आया, जब कैंसर से जूझ रहे पिता राम सिंह को देखकर देवेंद्र ने इस खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था, लेकिन पिता ने उन्हें खेल पर फोकस करने की सलाह दी। आखिरकार देवेंद्र ने पिता की सलाह मानी। 2020 पैरालंपिक में देवेंद्र ने 64.35 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर जीता। इसी के साथ वह पैरालंपिक इतिहास में तीन पदक जीतने वाले भारत के पहले एकल एथलीट बने।

साल 2014 में एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर जीतने वाले देवेंद्र ने आईपीसी वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया है।

साल 2004 में देवेंद्र झाझरिया को 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया, जिसके बाद साल 2012 में उन्हें 'पद्मश्री' मिला। साल 2017 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार) से नवाजा गया। साल 2022 में देवेंद्र 'पद्म भूषण' प्राप्त करने वाले पहले पैरा एथलीट बने।

--आईएएनएस

आरएसजी

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