भारत संग रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर अमेरिका नहीं बनाएगा दूसरे देशों से संबंध: मार्को रुबियो
नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान में चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहा है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच नजदीकियां देखने को मिलीं। इस बीच भारत दौरे पर आए अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश से हमारे संबंध भारत के साथ साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे।
यूएस और दूसरे देशों के बीच संबंध और अमेरिका-भारत के बीच के संबंध को लेकर अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा, "जहां तक दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों का सवाल है, हम दुनियाभर के देशों के साथ अलग-अलग स्तरों पर सहयोग करते हैं और विभिन्न तरीकों से काम करते हैं। भारत भी यही करता है। जिम्मेदार देश इसी तरह अपने संबंध को आगे बढ़ाते हैं लेकिन मैं दुनिया के किसी भी देश के साथ हमारे संबंधों को भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता, खासकर उन कारणों की वजह से जिनका मैंने पहले भी उल्लेख किया है।"
उन्होंने कहा कि युद्ध के सवाल पर मैं मिलिट्री टैक्टिक्स पर बात नहीं करने वाला हूं, सिर्फ इसलिए कि वह मेरा डिपार्टमेंट नहीं है। जब ईरान के साथ लड़ाई शुरू हुई, तो लक्ष्य तय थे और वे बहुत आसान थे। वे बहुत साफ थे। हम उनकी नेवी को खत्म करने वाले थे, जो हमने कर दिया है। हम उनकी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने की काबिलियत को काफी कम करने वाले थे, क्योंकि यही वो पारंपरिक ढाल थी जिसके पीछे वे छिपने की कोशिश कर रहे थे और हमने वो मकसद हासिल कर लिया है।
रुबियो ने कहा कि हम डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को नुकसान पहुंचाने वाले थे, ताकि ईरान इन सब चीजों को फिर से न बना सके। हमने वो भी हासिल कर लिया है। वो हमारे ऑपरेशन के टारगेट थे और उन्हीं पर टारगेट किया गया था। दूसरी तरफ, ईरान आतंकवादियों के प्रॉक्सी ग्रुप्स को स्पॉन्सर करना पसंद करता है और इन आतंकवादियों को इस बात की परवाह नहीं है कि वे क्या उड़ाते हैं। वे किसी भी चीज और हर किसी को उड़ा देते हैं। हम इन्हीं से निपट रहे हैं।
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा, "यह वह ईरान है जिसने कुछ समय पहले ही अपने हिज्बुल्लाह प्रॉक्सी के जरिए अर्जेंटीना में एक यहूदी सेंटर को उड़ा दिया था और बहुत से लोगों को मार डाला था। यह वह ईरान है जिसने सड़क किनारे बमों का इस्तेमाल करना शुरू किया, जिससे बहुत से लोग मारे गए और घायल हुए, जिनमें अमेरिकी सैनिक भी शामिल थे। यह वह ईरान है जिसने पूरी दुनिया में लोगों की हत्याएं और हत्या की कोशिशें संगठन की हैं, जिनमें आम लोग, विरोधी लोग और वे लोग भी शामिल हैं जिनसे वे सहमत नहीं हैं।"
दुनिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है जो ईरान से ज्यादा आतंकवाद को स्पॉन्सर करता हो और उन्होंने आतंकवाद को स्पॉन्सर करने और दुनिया भर में लोगों को टारगेट करने में लाखों-करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं और इसमें वे आम लोग भी शामिल हैं जो इसमें फंस गए हैं।
--आईएएनएस
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