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Udaipur हाउसिंग बोर्ड में नियमों की अनदेखी: एक प्लॉट दो को दे दिया
 

Udaipur हाउसिंग बोर्ड में नियमों की अनदेखी: एक प्लॉट दो को दे दिया

राजस्थान न्यूज़ डेस्क,  हाउसिंग बोर्ड की ओर से सवीना-प्रथम योजना में कॉमर्शियल भूखंडों के आवंटन में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। संभवत: प्रदेश के इतिहास में भी यह पहला मामला होगा, जब बोर्ड ने पहले तो एक ही भूखंड की दो अलग-अलग लोगों के नाम पर रजिस्ट्री करा दी। फिर 8 साल बाद दो दावेदार सामने आने पर गलती का पता चला तो एक आवंटी को तो वही मूल भूखंड एस-10 दे दिया, जबकि दूसरे को उससे सटा भूखंड एस-11 आवंटित किया गया। जिस दूसरे आवंटी को एस-11 भूखंड दिया गया, उसके समीप की 8.64 वर्ग मीटर स्ट्रिप ऑफ लैंड को रिजर्व प्राइज 5.98 लाख रु. में आवंटित कर दिया, जबकि बोर्ड का नियम है कि वह आवासीय जमीन के समीप अधिकतम 9.6 वर्ग मीटर टुकड़े को ही स्ट्रिप ऑफ लैंड में दे सकता है, किसी कॉमर्शियल भूखंडों पर यह नियम लागू नहीं होता।

मामला दबाने की कोशिशों के बीच बोर्ड के अफसरों में दो खेमे बनने और आपसी खींचतान के कारण यह चर्चा में आ गया है। अधिकारियों का एक पक्ष मामले से खुद को अनजान बताते हुए बिना नीलामी भूखंड आवंटित करने की प्रक्रिया को गलत बता रहा है और एक साल से फाइल मांगने का दावा कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पूरी प्रक्रिया को नियमानुसार सही बताते हुए फाइल देने से बच रहा है। इस मामले में तत्कालीन प्रोजेक्ट इंजीनियर सीनियर (वर्तमान में डूंगरपुर में आवासन बोर्ड प्रभारी) संजय चौबीसा से माेबाइल पर बात करनी चाही, लेकिन कई प्रयासाें के बावजूद उन्हाेंने काॅल अटेंड नहीं किया। मैसेज का भी जवाब नहीं दिया।


उदयपुर न्यूज़ डेस्क!!!

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