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Siwan  संभल कर चलें दस माह में 222 ने गंवाई जान, जिले के पांच थाना क्षेत्रों में चिह्नित किए गए हैं ब्लैक स्पॉट,सड़क दुघर्टना व घायलों को बचाने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं
 

Siwan  संभल कर चलें दस माह में 222 ने गंवाई जान, जिले के पांच थाना क्षेत्रों में चिह्नित किए गए हैं ब्लैक स्पॉट,सड़क दुघर्टना व घायलों को बचाने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं


बिहार न्यूज़ डेस्क जिले में सड़क दुघर्टनाएं रूकने को नाम नहीं ले रही हैं. प्रतिदिन एनएच, एसएच व ग्रामीण सड़कों पर हो रही सड़क हासदे में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि सड़क हादसे रोकने का प्रयास नहीं किया जा रहा है, बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं के मुकाबले किया गया रोकने का प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है.
सरकारी आंकड़े के अनुसार, जिले में इस साल के विगत दस माह में कुल 222 लोगों ने दम तोड़ा, जबकि 170 लोग जिन्दगी से जंग लड़ रहे हैं. इस सिलसिले में विभिन्न पुलिस थानों में 267 कांड अंकित किए गए हैं. बताया गया कि सड़क हादसे होने का कोई एक कारण नहीं है. सड़क हादसे कई कारणों पर होते हैं. इनमें सड़कों की बनावट, सड़कों पर चिन्हित किए गए ब्लैड स्पॉट के बाद भी सांकेतिक चिन्ह का न होना, वाहन चालकों को यातायात नियमों का सही से जानकारी नहीं, सड़कों के निर्माण के बाद समय से अनुरक्षण कार्य नहीं होने के कारण झाड़ियों का उगना और कम उम्र के अपरिपक्व युवाओं द्वारा वाहन का संचालन करना भी शामिल है.
जिले में सात ब्लैक स्पॉट चिन्हित जानकारी के अनुसार, जिले में कम से कम पांच सौ मीटर के क्षेत्र में होने वाली पांच से लेकर दस घटनाओं के बाद उस क्षेत्र को ब्लैक स्पॉट घोषित कर दिया जाता है. इस मापदंड के अनुसार, जिले में एनएच व एसएच पर कोई भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित नहीं किया जा सका है. ग्रामीण सड़कों पर जिले में कुल सात ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिनमें मुफस्सिल थाने क्षेत्र का टड़वा बाइपास से छोटपुर बाइपास, बड़हरिया थाना क्षेत्र का लकड़ी खुर्द पोखरा से माली मोड़ लकड़ी दरगाह, मैरवा थाना क्षेत्र का तीतरा बाजार से लकर पेट्रोल पंप व गुठनी मोड़ मैरवा से श्रीनगर मैरवा पेट्रोल पंप तक गुठनी थाना क्षेत्र का टेकनिया कुटी से टेकनिया गांव तक व गोहरूआ से सरया पेट्रोल पंप तक जबकि सराय ओपी क्षेत्र का वैशाखी चौराहा से हरदिया मोड़ पासवान चौक शामिल हैं.
क्या कहते हैं डीटीओ
प्रभारी डीटीओ जनार्दन कुमार ने बताया कि बढ़ते सड़क हादसों का मुख्य कारण वाहन चालकों की लापरवाही है. साथ ही हादसों में कमी लाना और घायलों की जान बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ परिवन विभाग की ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग व सड़क से संबधित विभाग की भी है. यदि सड़क नियमाकुल होता तो हादसे कम होंगे और ट्रामा सेंटर होंगे तो फौरन इलाज देकर घायल को बचाया जा सकता है.
हाईस्पीड सड़क दुर्घटना मुख्य कारण
परिवहन विभाग की मानें तो जिले में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं लापरवाही के कारण होती है. इनमें हाईस्पीड में वाहन चलाना एक है. वहीं दूसरी तरफ ड्राईवरों को दक्ष करने का कोई प्रॉपर व्यवस्था भी जिले में उपलब्ध नहीं है. वहीं दूसरी तरफ अधिकतर दो पहिए वाहनों के दुघर्टनाओं में वाहन चालक द्वारा हेलमेट नहीं पहनना सामने आता है.

सड़कों की स्थिति सुधरी, लेकिन सुविधा नदारद
परिवन विभाग की मानें तो जिले की सड़कों की स्थिति तो सुधर गयी लेकिन सुविधा नदारद हैं. नियमानुसार, फोरलेन पर सर्विस लेन नहीं, इसकारण सड़कों पर चलने वाले वाहन दूसरे रास्तों पर उतरते समय गलत कट ले लेते हैं. वहीं, ऐसी सड़कों पर ओवरफुट पास, अंडर पास के साथ ही बड़ी गाड़ियों के पार्क करने को लेकर लेवाई की भी व्यवस्था नहीं है. लिहाजा, सड़क पर खड़ी गाड़ियों में छोटे वाहनों की टक्कर हो जाती है और वाहन चालक सहित उसपर सवार की गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं.
घायलों के दम तोड़ने का मुख्य कारण ट्रामा सेंटर नहीं
सड़क दुघटनाएं को तो पूरी तरह रोका नहीं जा सकता है लेकिन सड़क पर सुविधा देकर सड़क दुघर्टनाओं में हुए घायलों की जान बचायी जा सकती है. वाहनों के अत्यधिक दबाववाले सड़कों पर ट्रामा सेंटर की व्यवस्था होनी चाहिए. जहां स्पेशलिस्ट डॉक्टर व दवा मौजूद रहे. ताकि गोल्डेन टाइम में घायल को उपचार देकर उसकी जान बचायी जा सके. मिले एक आंकड़े के अनुसार, जिले में एक भी ट्रामा सेंटर नहीं है.
क्षेत्र में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं
. प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न सड़कों पर कई डेंजर जोन बन गए हैं. इन जगहों पर प्राय सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. इसके कई लोगों के परिवार उजर गए हैं. कईयों की दुनिया बर्बाद हो गई हैं. सड़कों पर बिन बुलाए मेहमान की तरह दुर्घटनाएं लोगों की जिंदगी को अपने आगोश में ले लेती हैं. प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली एनएच 227 ए पर स्थित हसनपुरा, बाइस कह्वा पांडेय मोड़, कौड़िया नत्थू मोड़, मघरी, बसन्तपुर नहर पुल, एनएच 331 पर मलमलिया नहर पुल, नगवां ओवरब्रिज, नदुआं, हिलसर, बैंक के पास, पाण्डेयटोला मोड़, भगवानपुर- महाराजगंज रोड में सहसरांव, विमल चौक नहर पुल, कोइरीगांवा में महाराजगंज सीमा पर बना पुल सहित कई अन्य जगहों पर हादसे होते रहते हैं. ये जगह डेंजर जोन अथवा ब्लैक स्पॉट बन चुके हैं. हालांकि, कुछ जगहों पर तीखा मोड़ जैसे संकेत लगाए गए हैं. वहीं महाराजगंज सीमा पर कोईरीगांवा का बिना रेलिंग का पुल भी हादसे को दावत देता है.
इस साल क्षेत्र में हुई विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में एक दर्जन से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं.


सिवान न्यूज़ डेस्क
 

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