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Rohtas चिंता युवाओं को मानसिक रोगी भी बना रही नशे की लत

अगर तेजी से बढ़ती जा रही है नशे की लत, यहाँ जानें भारत में कितने लोग करते हैं नशा, सामने आया हैरान कर देने वाला खुला

बिहार न्यूज़ डेस्क युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं. अस्पतालों के ओपीडी में इससे पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, एनएमसीएच के मानिसक रोग विभाग और न्यूरोलॉजी में इलाज कराने आनेवाले रोगियों में लगभग 20 से 12 प्रतिशत नशे के शिकार युवाओं की संख्या रहती है. यही नहीं नशा विमुक्ति केन्द्रों में भी भर्ती होनेवाले लगभग 80 प्रतिशत मरीज 15 साल से  साल के ऐसे युवा हैं जिनका नशा के कारण मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है. एनएमसीएच के मानसिक रोग और नशा मुक्ति केन्द्र के विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार, आईजीआईएमएस के मानसिक रोग विभाग के हेड डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में आनेवाले मरीजों में 10 से 15 मरीज युवा वर्ग के होते हैं जो नशा के कारण गंभीर मानसिक रोगी बन चुके हैं. ये तंबाकू, गांजा, भांग, स्मैक, सुलेशन, अमृतांजन, आयोडेक्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन कर शारीरिक रूप से भी कमजोर हो जाते हैं. पीएमसीएच के न्यूरोलॉजी विभाग के वरीय प्रो.डॉ. संजय कुमार ने बताया कि नशा से रोकने पर इन किशोर और युवाओं में अनिंद्रा, बेचैनी, गुस्सा, झगड़ा, आत्महत्या और छोटे-मोटे अपराध की प्रवृति बढ़ती है. नशा के कारण नसों का सूखना, हाथ-पैर में झुनझुनी, तनाव, शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो चुके 12 से 15 युवा हर दिन ओपीडी में इलाज कराने पहुंचते हैं.

नशा से घृणा करें, नशेड़ी से नहीं

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. बिंदा सिंह ने कहा कि पीड़ित के साथ-साथ परिवार के सदस्यों की सही काउंसलिंग से पीड़ित युवाओं को नशा से मुक्ति मिल सकती है. काउंसिलिंग से पीड़ित की इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया जाता है. उसकी नकारात्मक सोच को इसमें परिवार, समाज का सहयोग भी जरूरी है. लोगों को नशा से घृणा करना चाहिए, नशेड़ी से नहीं.

नशा विमुक्ति केन्द्र में भर्ती 80 प्रतिशत किशोर व युवा वर्ग के

डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि एनएमसीएच में  बेड का नशा मुक्ति वार्ड में भर्ती मरीजों में से 24 की उम्र 16 से  साल के बीच का है. कहा कि नशा एक बीमारी है. इसका इलाज संभव है. अगर कोई किशोर पीड़ित है तो जितनी जल्दी इलाज मिलेगा, उतना जल्दी इससे मुक्ति मिल सकता है. इलाज के साथ परिवार और समाज का सहयोग भी जरूरी है.

 

रोहतास न्यूज़ डेस्क

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