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Ranchi एमडीएम के लिए एसएमएस में रांची के स्कूल शीर्ष पर, पारदर्शिता के लिए एसएमएस जरूरी
 

Ranchi एमडीएम के लिए एसएमएस में रांची के स्कूल शीर्ष पर, पारदर्शिता के लिए एसएमएस जरूरी

झारखण्ड न्यूज़ डेस्क, मध्याह्न भोजन से संबंधित जानकारी देने के लिए स्कूलों को प्रतिदिन एसएमएस करना अनिवार्य है. इस मामले में रांची के स्कूल शीर्ष पर हैं. नवंबर में अबतक रांची के 97 प्रतिशत स्कूल एसएमएस कर रहे हैं. वहीं सिमडेगा के 81 प्रतिशत स्कूल और धनबाद के 80 प्रतिशत स्कूल एसएमएस कर रहे हैं.

लातेहार जिला का रिकॉर्ड सबसे खराब है. यहां के मात्र 36 प्रतिशत स्कूल ही एसएमएस से मिडडे-मील की जानकारी मुहैया करा पा रहे हैं. लातेहार में 1160 स्कूल हैं, जिनमें 419 के द्वारा इस माह एसएमएस किया गया है. रांची में 2127 स्कूल हैं. सिमडेगा में 1080 स्कूल में 878 और धनबाद में 1832 में से 1483 स्कूल एसएमएस कर रहे हैं. डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सह नोडल पदाधिकारी (एमडीएम) कामेश्वर सिंह ने बताया कि हालांकि इसमें मर्ज स्कूलों की संख्या भी है, इसलिए कई जिलों से अधिक एसएमएस मिलने के बाद भी आंकड़े कम हो रहे हैं.
रांची के सात प्रखंडों में शत-प्रतिशत एसएमएस रांची के सात प्रखंडों के स्कूल शत-प्रतिशत एसएमएस रोजाना कर रहे हैं. इसमें बेड़ो, चान्हो, नगड़ी, ओरमांझी, राहे, रातू और सिल्ली प्रखंड के स्कूल शामिल हैं. इनके अलावा लापुंग, तमाड़, सोनाहातू, नामकुम और कांके के 95 फीसदी से अधिक स्कूल रोजाना एसएमएस कर रहे हैं. जिला शिक्षा विभाग ने कहा है कि अभी भी कई स्कूल हैं, जो एसएमएस करने में कोताही बरत रहे हैं. वैसे स्कूलों पर नियमसंगत कार्रवाई की जाएगी.
केंद्र सरकार की पोषणा योजना के तहत विद्यार्थियों की स्कूलों में उपस्थिति के तहत मिड डे मील का लभा मिलना है. इसकी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नामांकित बच्चों के बीच उपस्थित बच्चों का डाटा स्कूलों द्वारा उपलब्ध कराया जाना है. इससे साफ होगा कि प्रतिदिन किस स्कूल में कितनी उपस्थिति है और कितने के लिए मिड डे मील बनेगा.
रांची के स्कूलों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन हमें शत प्रतिशत एसएमएस का रिकॉर्ड प्राप्त करना है. जिन प्रखंडों से कम एसएमएस आ रहे हैं, उन्हें नोटिस किया गया है.
- आकाश कुमार, डीएसई
कुछ स्कूलों का कहना है कि एसमएस प्रतिदिन किए जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण भी रोजाना एसएमएस विभाग तक नहीं पहुंच रहा है. इसके अलावा विभाग द्वारा जारी सीआरपी की सूची में भी खामियां हैं. कई स्कूल ऐसे हैं, जो मर्ज हो चुके हैं, लेकिन उसके बारे में भी डाटा मांगा जा रहा है.

राँची न्यूज़ डेस्क !!!
 

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