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Noida  सात साल बाद भी ग्रेनो वेस्ट तक मेट्रो नहीं पहुंची, चार साल तक घूमती रही फाइल

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उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  नोएडा से ग्रेनो वेस्ट के बीच करीब सात साल पहले मेट्रो चलाने का निर्णय लिया गया. इन सात वर्षों में डीपीआर तैयार होने से लेकर रूट बदलने समेत कई प्रक्रिया हुई. इसके बावजूद ग्रेनो वेस्ट में मेट्रो की शुरुआत नहीं हो सकी. इस साल फरवरी में मेट्रो के संचालन के लिए संशोधित डीपीआर को दोबारा मंजूरी के लिए शासन के पास भेजी जा चुकी है.

दूसरी ओर, मेट्रो नहीं चलने से ग्रेनो वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस क्षेत्र में बस सेवा भी नहीं होने से ऑटो-कैब के भरोसे रहने से लोगों को परेशानियों के साथ-साथ अतिरिक्त आर्थिक भार भी उठाना पड़ रहा है.

वर्ष 2017 में नोएडा से ग्रेनो वेस्ट के बीच सेक्टर-51 से नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो चलाने का निर्णय लिया गया था. इसके बाद इसके रूट तय करने के लिए कंसलटेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया की गई. रूट समेत अन्य बिंदुओं पर डीपीआर तैयार कर वर्ष 2019 के शुरूआत में इसको नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बोर्ड बैठक में मंजूरी देकर शासन के पास भेज दिया. दिसंबर 2019 में यूपी कैबिनेट ने इस रूट को मंजूरी भी दे दी.

यूपी कैबिनेट की मंजूरी करीब साढ़े तीन साल बाद भी इस रूट पर मेट्रो का काम शुरू नहीं हो सका है. इस साल नए सिरे से इस लाइन का रूट तय कर संशोधित डीपीआर तैयार की गई. अभी तक इस लाइन पर मेट्रो सेक्टर-51 से चलकर सेक्टर-72 बाबा बालकनाथ मंदिर के सामने से सीधे पर्थला गोलचक्कर होते हुए ग्रेनो वेस्ट की तरफ जाती. अब सेक्टर-51 से 61, 71, 122, पर्थला गोलचक्कर होते हुए ग्रेनो वेस्ट की तरफ जाएगी. एनएमआरसी व प्राधिकरण स्तर पर मंजूरी के बाद इस फरवरी महीने में इसको फिर से यूपी कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन अभी तक शासन की मुहर नहीं लगी है.

चार साल तक घूमती रही फाइल: दिसंबर 2019 में यूपी कैबिनेट से मंजूरी के बाद जनवरी 2020 में इस रूट को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया था. इसके बाद करीब चार साल यानि नवंबर 2023 तक फाइल केंद्र सरकार, डीएमआरसी, यूपी व एनएमआरसी के बीच घूमती रही. केंद्र सरकार के आवासन और शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से इस रूट को लेकर आपत्ति और कुछ जानकारी मांगने के लिए तीन-चार फाइल को वापस भेजा गया. इसके बाद आपत्तियां दूर की गईं. इसके बाद मंत्रालय के अधिकारियों ने वर्ष 2023 के मार्च महीने में मौके पर आकर सेक्टर-51 के पास रूट को देखा, लेकिन वह सहमत नहीं हुए. इसके बाद फिर करीब आठ महीने तक बैठक व पत्राचार हुआ, लेकिन इस रूट को लेकर सहमति नहीं बनी और नवंबर 2023 में केंद्र सरकार ने इस रूट को मंजूरी देने से साफ इंकार कर फाइल को लौटा दिया.

 

 

नोएडा न्यूज़ डेस्क

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