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Nalnda लंपी को ले पशुपालकों को घबराने की नहीं है आवश्यकता
 

Nalnda लंपी को ले पशुपालकों को घबराने की नहीं है आवश्यकता


बिहार न्यूज़ डेस्क पशुओं की बिमारी लंपी को लेकर जिले के पशुपालक दहशत में हैं. जिले के सभी प्रखंडो से पशुपालक लंपी बिमारी की शिकायत करते हैं. लेकिन, अगर सरकारी आंकड़ा की बात की जाए तो जिले में एक भी पशु को लंपी बिमारी नहीं हुई है. किसी भी पशुपालकों द्वारा अभी तक इस बिमारी की शिकायत जिला पशुपालन विभाग से नहीं किया है. पशुपालन विभाग में लिखित शिकायत के बाद स्थानीय डॉक्टरों की टीम द्वारा जांच की जाती है. जांच के बाद शक होने पर जिला पशुपालन विभाग द्वारा राज्य पशुपालन विभाग को पत्र भेजा जाता है. राज्य से आए पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा पशुओं का सैंपल लिया जाता है. सैंपल के जांचोपरांत पुष्टि होने पर पशुओं का उपचार किया जाता है.

पशु चिकित्सक सह लंपी रोग नोडल ऑफिसर डॉ़ चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि लंपी वायरस पशुओं मे होने वाले एक स्कीन डिजीज है. जो केप्रीपॉक्स वायरस के कारण होती है. ये बीमारी गायों और भैंसों में होती है. इस वायरस के कारण गाय और भैंस के शरीर पर मोटी-मोटी गांठें दिखने लगती हैं. चमड़े में छेद के साथ उसमें मवाद उत्पन्न हो जाता है. संक्रमित पशु को बुखार आता है, वजन कम होने लगता है, आंखों से पानी टपकना, लार बहना, दूध कम देना और पशुओं को भूख न लगना लंपी के लक्षण हैं. लंपी वायरस मच्छर या खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए फैलता है. इनमें मक्खी और मच्छर शामिल हैं. जो एक मवेशी से दूसरे मवेशी में इस रोग को फैलाने का काम करते हैं. उन्होने बताया कि लंपी होने पर पशुओं को अलग रखें, तबेले की साफ सफाई रखें, मच्छरों को भगाने के लिए स्प्रे करें.
टीकाकरण की नहीं है व्यवस्था
बिहार में लंपी बिमारी का अभी टीकाकरण की व्यस्था सरकारी स्तर पर नहीं है.
लंपी होने पर चिकित्सकों द्वारा दवाओं के माध्यम से उपयार किया जा रहा है. हालांकि जिले में अभी लंपी का कोई मामला सामने नहीं आया है.

नालंदा  न्यूज़ डेस्क
 

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