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Jhansi  दावों से अलग, महंगे दामों पर खाद खरीद रहे किसान, डीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में चयनितों को 1900 रुपये में मिली डीएपी
 

Jhansi  दावों से अलग, महंगे दामों पर खाद खरीद रहे किसान, डीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में चयनितों को 1900 रुपये में मिली डीएपी


उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  दावे कुछ भी हों लेकिन जिले में डीएपी निर्धारित से अधिक दामों पर मिल रही है. कृषि में विविधता लाकर आमदनी में इजाफे के लिए डीएम के निर्देश पर संचालित उनके ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़े किसान को भी समस्या हो रही है. इस प्रोजेक्ट से जुड़े कुछेक एफपीओ ने इन स्थितियों में काम से साफ इनकार कर दिया है.

रबी जनपद की प्रमुख फसल है. लगभग तीन लाख हेक्टेयर में गेहूं, चना, सरसों, मटर, मसूर आदि बोया जाता है. डीएपी के साथ यूरिया की भी डिमांड बहुत अधिक रहती है. इस सीजन में 49,600 मीट्रिक टन डीएपी व 51,150 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हो जाती है. अभी तक जनपद में 35,353 एमटी डीएपी और 28,271 एमटी यूरिया आ चुकी है. इसमें से 34,286 एमटी डीएपी व 17,354 एमटी यूरिया का किसान उठान कर चुके हैं. शेष यूरिया व डीएपी गोदामों में रखी है. पिछले वर्ष की तरह इस साल खाद की किल्लत तो नहीं ै लेकिन वितरण में किसानों से अतिरिक्त धन वसूला जा रहा हैं. डीएपी की जो बोरी 1,350 रुपये में मिलनी चाहिए वह इस समय 1900 रुपये प्रतिबोरी बेची जा रही है. खाद की कालाबाजारी के चलते किसानों के लिए संचालित योजनाएं बुरी तरह से प्रभावित हो गयी हैं. इनमें चयनित किसानों भी अधिक दामों पर खाद मजबूरी में खरीद रहे है.
70-30 के अनुपात में खाद का आवंटन - शासन के मुताबिक इफको की खाद के आवंटन का बाकायदा एक फार्मूला बनाया गया है. जिसके तहत 80 प्रतिशत खाद सहकारी समितियों में भेजी जाएगी. वहीं 20 प्रतिशत इफको की फ्रेंचाइजी को दी जाएगी. हालांकि जनपद में जिलाधिकारी ने इस अनुपात को 70 सहकारी समितियां व 30 फ्रेंचाइजी को कर रखा है.
खरीफ में किया था डीएपी व यूरिया की उठान
पिछली रबी के सीजन में खाद संकट ने किसानों को हिलाकर रख दिया था. इसीलिए इस बार किसान खाद के लिए बहुत संजीदा रहे. खरीफ में खाद का बहुत कम इस्तेमाल होने के बावजूद किसानों ने रबी के लिए उसका उठान कर लिया था. खरीफ में डीएपी 5,628 एमटी की तुलना में किसानों ने 15,970 एमटी खरीदी थी. वहीं लक्ष्य 4,693 एमटी के सापेक्ष 7,105 एमटी यूरिया क्रय किया था. इस खाद का कुछ हिस्सा खरीफ में इस्तेमाल हुआ था वहीं बड़ा हिस्सा रबी के लिए भंडारित कर लिया था. खरीफ में खाद उठान पर शासन ने जांच करवायी थी. पड़ताल में पाया गया था कि किसान खाद का स्टाक कर रहे हैं, इसलिए बिक्री अधिक हुई.


झाँसी  न्यूज़ डेस्क
 

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