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Haridwar अवैध स्कूली वाहनों में जोखिम में बच्चों की जान, विक्रम, ऑटो, ई-रिक्शा में लाए-ले जाए जा रहे बच्चे, एआरटीओ स्कूली वाहनों के रूप नहीं देता इन्हें परमिट
 

Haridwar अवैध स्कूली वाहनों में जोखिम में बच्चों की जान, विक्रम, ऑटो, ई-रिक्शा में लाए-ले जाए जा रहे बच्चे, एआरटीओ स्कूली वाहनों के रूप नहीं देता इन्हें परमिट


उत्तराखंड न्यूज़ डेस्क, हरिद्वार में अवैध स्कूली वाहनों में बच्चों की जान जोखिम में डाली जा रही है. विक्रम, ऑटो, ई-रिक्शा, रिक्शा को एआरटीओ की ओर से स्कूली वाहन के रूप में परमिट जारी नहीं किया जाता है. इसके बावजूद इन वाहनों में स्कूली बच्चों को लाया और ले जाया जा रहा है. यहीं नहीं इन वाहनों में क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठाए जा रहे हैं. लेकिकन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

 अधिकांश स्कूलों से बच्चों को लाने और ले जाने वाले वाहन नियमों के विपरीत संचालित होते दिखे. सीधे तौर पर ये वाहन बच्चों की जान से खिलवाड़ करते नजर आए. बैटरी-रिक्शाओं में क्षमता से ज्यादा स्कूली बच्चे ले जाए जा रहे थे. इन बैटरी रिक्शा पर न जाली लगी मिली और न ही बस्ता रखने का अलग से स्थान दिखा. अधिकांश बैटरी रिक्शाओं पर वाहन स्वामी का पता और दूरभाष नहीं लिखा था.

स्कूल के बच्चों के आवागमन के लिए लगी कार, टेंपो, विक्रम आदि वाहनों के शीशों पर रेलिंग या जाली नहीं लगी मिली. हालांकि कई बसों के शीशों पर जाली लगी थी. कई वाहनों में बस्ता रखने की जगह थी, लेकिन सभी ई-रिक्शा, टेंपो, विक्रम आदि में अलग से बस्ता रखने की कोई व्यवस्था नही दिखी. इन वाहनों में बस्ता बच्चों के पास या वाहनों के बाहर टंगा दिखा. बच्चों को लाने-ले जाने वाली कार, टेंपो, विक्रम आदि पर पीला रंग भी नहीं था. स्कूली वाहनों पर किसी प्रकार का कोई पत्र भी चस्पा नहीं मिला. हालांकि स्कूली बस, कार, ऑटो, विक्रम पर वाहन स्वामी का पता और दूरभाष लिखा मिला. अधिकांश निजी स्कूलों से छोटे बच्चों को ई-रिक्शा, ऑटो, विक्रम में लाने और लेजाने का कार्य होता दिखाई दिया.
अधिकांश स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि स्कूलों द्वारा संचालित वाहनों में नियमों का पालन किया जा रहा है. कई वाहनों को परिजनों ने अपने स्तर पर बच्चों को स्कूल व घर छोड़ने के लिए लगाया है. ऐसे वाहनों में स्कूल प्रबंधन का कोई हस्तक्षेप नहीं है.

हरिद्वार न्यूज़ डेस्क !!!
 

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