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Allahabad संगम में डुबकी लगाने को जल नहीं, यमुना के कुंए भी सूख रहे

 यमुना नदी 1376 किलोमीटर लंबी है।

उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  इस साल गंगा-यमुना जल संकट से कराह रही हैं. गंगा की हालत ऐसी हो गई है कि श्रद्धालु डुबकी नहीं लगा सकते. संगम में लोग खड़े होकर स्नान कर रहे हैं. लबालब रहने वाली यमुना संगमनगरी के एक तिहाई हिस्से की प्यास बुझाती है. करेलाबाग में जलकल का इनटेक वेल यमुना में डूबा रहता था. इस साल इनटेक वेल में यमुना का पानी लेने के लिए 41-41 हॉर्स पॉवर के नौ पंप लगाने पड़े हैं. शहर की पांच लाख से अधिक आबादी को सामान्य से कम पानी मिल रहा है. यमुना में जल संकट के कारण खुसरोबाग से एक घंटा जलापूर्ति घटानी पड़ी है. संगम के पास छतनाग में गंगा और नैनी में यमुना का जलस्तर पिछले सात साल में सबसे कम हो गया है. फाफामऊ से संगम तक कछार में टीले गंगा की दशा बयां कर रहे हैं. यमुना में भी जल की कमी की झलक इसके प्रवाह क्षेत्र में देखी जा सकती है. सिंचाई विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि गंगा और यमुना की स्थिति क्या से क्या हो गई है. 23  को संगम के पास छतनाग में गंगा का जलस्तर 23  को 70.15 मीटर रहा. पिछले साल भी गंगा में जल कम (70.93 मीटर) था, लेकिन इस साल तो जल से अधिक टीले दिखाई दे रहे हैं.

नैनी में यमुना का जलस्तर सामान्य रूप से 72 मीटर से अधिक रहता है. सिर्फ 2013 और 2018 में यमुना का जलस्तर 72 मीटर से कम हुआ, लेकिन इस वर्ष से अधिक था. इस वर्ष छतनाग में गंगा का जलस्तर 71 मीटर और नैनी में यमुना में जलस्तर 72 मीटर से बहुत कम है. यही वजह है कि इस साल गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं को संगम में डुबकी लगाने के लिए पर्याप्त जल नहीं मिला. एक तिहाई शहर को जलापूर्ति के लिए यमुना के इनटेक वेल में पानी लेने के लिए नौ अतिरिक्त पंप लगाने पड़े.

 

 

इलाहाबाद न्यूज़ डेस्क

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