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Allahabad एसआरएन में ऑनलाइन-ऑफलाइन के फेर में मरीज बेहाल

Noida  चिंताजनक अस्पतालों में बुखार-सांस संबंधी तकलीफ के मरीज बढ़े

उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  मंडल के सबसे बड़े अस्पताल एसआरएन में मरीज ऑनलाइन-ऑफलाइन के चक्कर में परेशान हैं. ओपीडी में आने वाले मरीज के पास यदि मोबाइल नहीं है तो स्ट्रेचर मिलेगी और न ही व्हीलचेयर. डॉक्टर को दिखाने के लिए पर्चा भी नहीं बनेगा. पर्चा बनने के बाद यदि डॉक्टर ने कोई जांच लिख दी तो खिड़की पर यूजर चार्जेज जमा करने में पसीने छूट जाएंगे. क्योंकि जब खिड़की पर नंबर आता है तो एक अलग परेशानी क्योंकि किसी मरीज व तीमारदार को यह पता नहीं रहता कि किस तरह की जांच में कितना पैसा लगा. साथ ही जो भी निर्धारित चार्जेज हैं, उसे मरीज को खिड़की पर नकद जमा करना पड़ेगा. यदि फुटकर पैसा नहीं है तो मरीज को या तो दोबारा लाइन में लगना पड़ेगा या कुछ अतिरिक्त रुपयों का संतोष करना पड़ेगा. हालांकि ज्यादातर मरीज व तीमारदार दोबारा लाइन में लगने से बचने के लिए मजबूरी में अतिरिक्त रुपये देकर संतोष कर लेते हैं.

पर्चा ऑनलाइन तो पर्ची ऑफलाइन क्यों : यूजर चार्जेज जमा करने के लिए लाइन में लगे मरीजों ने बातचीत में बताया कि शुल्क ऑनलाइन जमा किए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए. इससे समय कम लगेगा और आर्थिक नुकसान भी नहीं होगा. करछना के पवनेश कुमार को मेडिसिन विभाग की ओर से थायराइड जांच लिखी गई थी. खिड़की पर उन्हें दो सौ रुपये का नोट दिया तो काउंटर पर बैठी महिला ने लौटा दिया. लाइन से निकलकर वे बाहर दुकान से फुटकर लेकर आए तो दोबारा लाइन में खड़े होना पड़ा. रक्त की जांच कराने आए सुधीर ने फुटकर न होने के चक्कर में 13 रुपये काउंटर पर ही छोड़ दिए.

हाथ में खराब हो जाते हैं जांच के सैंपल

आरती कुशवाहा का बेटा चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती है. उन्हें जांच का सैंपल मेडिकल कॉलेज में जमा करना था. मेडिकल कॉलेज पहुंचीं तो पता चला कि एसआरएन में यूजर चार्जेज जमा करके आइये. वे जांच सैंपल हाथ में लिए हुए लाइन में लगी रहीं. यूजर चार्जेज जमा करके जब दोबारा गईं तो पता चला कि सैंपल खराब हो गया. आरती की तरह लोग प्रतिदिन परेशान होते हैं.

 

 

इलाहाबाद न्यूज़ डेस्क

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