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Allahabad किशोरावस्था में शौकिया नशा उम्र के साथ दौड़ रहा नसों में

अगर तेजी से बढ़ती जा रही है नशे की लत, यहाँ जानें भारत में कितने लोग करते हैं नशा, सामने आया हैरान कर देने वाला खुला

उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  बदलते समय में युवा तेजी से नशे की ओर बढ़ता जा रहा है. किशोरावस्था में शौकिया किया जाने वाला बढ़ती उम्र में युवाओं के नशों में सूखा व शराब का नशा दौड़ने लगा है. ऐसे में अभिभावक इनका नशा छुड़ाने को मनोचिकित्सक की मदद ले रहे है. चिकित्सकों की माने तो 14 वर्ष से 40 वर्ष तक के लोग ज्यादा नशे के शिकार हो रहे हैं. इनमें महिलाएं और युवतियां भी शामिल हैं.

स्वास्थ्य विभाग के मानसिक रोग विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हर दिन करीब चार मरीज जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में पहुंच रहे है. जहां अभिभावक युवाओं को नशे से मुक्त कराने की सलाह मांगते हैं. इस तरह से एक माह में करीब 120 मरीज नशे के आ रहे है. इनमें औसतन 14 साल से 40 साल तक के लोग शामिल है. चिकित्सकों की माने तो किशोरावस्था में नशा तेजी से बढ़ रहा है. इनमें सूखा नशा के साथ ही नींद और दर्द की दवाओं को इस्तेमाल किया जा रहा है. कारण इनसे ज्यादा स्मैल नहीं आती और वह भरपूर नशे में रहते हैं. समय के साथ यह युवा वर्ग शराब के साथ सूखे नशे यानी स्मैक, चरस व नशीले ड्रग्स के चंगुल में फंस रहे हैं. नशा हर रूप में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है. मनोचिकित्सक डॉ. अंतरा माथुर ने बताया कि युवाओं व पुरुषों के साथ युवतियां व महिलाएं भी नशे का सेवन कर रही है. इन दिनों युवतियों में शराब और सिगरेट का क्रेज बढ़ा है. वहीं ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में गुल मंज और तंबाकु का सेवन बढ़ा है. हर दिन सेंटर पर लगभग चार नए मरीज नशा से छुटकारा पाने के लिए आ रहे हैं. साइकोथेरेपिस्ट डॉ. अंशु सोम ने कहा कि युवा और प्रोढ़ के साथ किशोर भी नशे की ओर जा रहा है. युवतियों भी नशा करने में पीछे नहीं है. इन दिनों नशे से छुटकारा पाने के लिए केस बढ़े हैं.

मैक से पूरा स्नायु तंत्र प्रभावित होता है

चिकित्सकों की माने तो स्मैक से पूरा स्नायु तंत्र प्रभावित होता है. इस नशे से व्यक्ति काफी उग्र हो जाता है और उसे लगता है कि दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान है. इसमें उसके अपराध करने की भी आशंका बनी रहती है. नशा करने वाला व्यक्ति कल्पना की दुनिया में चला जाता है. ये नशा करने वाला दिमागी सुनपन और उच्च रक्तचाप की चपेट में आ जाता है. लेकिन अधिक सेवन से फेफड़े, किडनी, लीवर के फेल होने का खतरा बढ़ जाता है.

इन नशों के चंगुल में फंस रहे लोग

● पारंपरिक नशा इसमें तंबाकू, अफीम, सुल्फा, भांग और शराब आदी आते हैं.

● सिंथेटिक ड्रग्स इसमें स्मैक, हेरोइन, कोकीन, क्रेक कोकीन, नशीले ड्रग्स और इंजेंक्शन आते हैं.

● यह भी हैं नशे का सामान बूट पालिस या विक्स वेपोरब को ब्रेड में लगाकर खाना, व्हाइटनर या सुलेशन सूंघने का नशा गरीब बस्तियों और छोटी उम्र के लड़कों में देखने को मिलता है.

ऐसे करें बच्चे का बचाव

● बच्चों में आत्म निर्भरता और आत्म अनुशासन की आदत डालें

● बच्चे में खुद फैसले लेने और सही गलत में अंतर करने की क्षमता पैदा करें

● समय-समय पर उससे परेशानियों के बारे में पूछें और डांटने के बजाए उसकी मदद करें

● टोकाटोकी के बजाए उसकी परेशानी समझने की कोशिश करें

● लगातार संवाद बनाए रखें, उसके दोस्तों से मिलें व उनके संबंध में जानकारी रखें

 

 

इलाहाबाद न्यूज़ डेस्क

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