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भारत-रूस का बड़ा प्लान 100 अरब डॉलर का है प्लान,चीन और अमेरिका की बड़ी टेंशन 

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बिज़नस न्यूज़ डेस्क,'सिर पर लाल टोपी वाला रूस...' राज कपूर की फिल्म के एक गाने की इस लाइन ने पूरे रूस में हलचल मचा दी थी. आज फिर ये लाइन रूस की धरती पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुबान पर थी. अब आप समझ सकते हैं कि भारत और रूस की दोस्ती कितनी गहरी है और दूसरे देशों की समझ से कितनी परे. यही वजह है कि अमेरिकी सरकार पूरी तरह हैरान है. वहीं रूस के करीब आ रहा चीन भी इस दोस्ती को देखकर डर गया होगा. खैर, यहां बात सिर्फ राजनीति और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की नहीं होगी. यहां चर्चा इस बात की होगी कि अगले 5 से 6 सालों में भारत और रूस के बीच किस तरह के आर्थिक संबंध देखने को मिल सकते हैं. दरअसल, दोनों देशों ने 100 बिलियन डॉलर की योजना बनाई है.

इस पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं. दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की इस योजना को देखकर अमेरिका, चीन और यूरोप के देश चिंतित हो गए हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि भारत-रूस ने किस तरह की योजना बनाई है. क्या है 100 बिलियन डॉलर की योजना? भारत और रूस द्वारा बनाई गई 100 बिलियन डॉलर की योजना दरअसल द्विपक्षीय व्यापार के लिए है। जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने व्यापार में संतुलन लाने, गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को दूर करने और यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU)-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र की संभावनाओं को तलाशने का लक्ष्य रखा है।पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कई दौर की बातचीत हुई। इसके बाद मंगलवार को दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने एक संयुक्त बयान जारी कर पूरी दुनिया को अपनी योजना की जानकारी दी। इसमें कहा गया कि दोनों देश राष्ट्रीय मुद्रा का उपयोग करके द्विपक्षीय निपटान प्रणाली स्थापित करने और आपसी निपटान प्रणाली में डिजिटल वित्तीय साधन लाने की योजना बना रहे हैं।

इन बातों पर भी हुई चर्चा

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय रूस यात्रा के दौरान ऊर्जा, व्यापार, विनिर्माण और उर्वरक क्षेत्र में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही, दोनों देशों ने द्विपक्षीय संतुलन व्यापार के लिए भारत से वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने और विशेष निवेश प्रणाली के तहत निवेश को फिर से मजबूत करने पर जोर दिया।वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत को रूस की मदद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब दुनिया खाद्य उत्पादों, ईंधन और उर्वरकों की कमी से जूझ रही थी, तब भारत ने किसानों को कोई परेशानी नहीं होने दी और इसमें रूस ने अहम भूमिका निभाई। मोदी ने यह भी कहा कि रूस की मदद से देश में पेट्रोल और डीजल की कमी नहीं हुई।

अमेरिका और चीन के मुकाबले रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार आधा

इस समय भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 60 अरब डॉलर है। जो अमेरिका और चीन के मुकाबले करीब आधा है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 118.28 अरब डॉलर है। जबकि चीन के साथ सबसे ज्यादा 118.40 अरब डॉलर है। चीन से रिश्ते खराब होने के बाद भी भारत का सबसे ज्यादा कारोबार यहीं से होता है। व्यापार घाटे की बात करें तो यह 85 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। वहीं रूस के साथ यह 57 अरब डॉलर को भी पार कर गया था।वहीं वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का अमेरिका के साथ 36.74 बिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष था। अमेरिका उन चंद देशों में से एक है, जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष है। इस सूची में यूके, बेल्जियम, इटली, फ्रांस और बांग्लादेश भी शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल व्यापार घाटा 264.9 बिलियन डॉलर की तुलना में घटकर 238.3 बिलियन डॉलर रह गया।

क्यों चिंतित हैं चीन और अमेरिका?

जब से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस की धरती पर पहुंचे हैं। तब से चीन और अमेरिका में बेचैनी बढ़ गई है। अगर सबसे पहले चीन की बात करें तो चीन रूस से अपनी नजदीकियां बढ़ाने में लगा हुआ है। वहीं दूसरी ओर रूस की भारत से दोस्ती रास नहीं आ रही है। ऐसे में भारत के पास रूस को चीन से दूर रखने का बेहतरीन मौका है। ताकि किसी भी वक्त चीन को धमकाने के लिए रूस की मदद ली जा सके।

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