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पुरुषोत्तम मास का दसवां दिन: गंगा दशहरा पर अभिजीत मुहूर्त के साथ रवि योग, नोट कर लें राहुकाल

 

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। सनातन धर्म में नारायण को प्रिय पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का काफी महत्व है। 25 मई 2026 (सोमवार) को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। इसी गंगा दशहरा का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा मनाने का विधान है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा का खास महत्व माना जाता है।

खास बात यह है कि सोमवार को पूरे दिन रवि योग बना हुआ है और अभिजीत मुहूर्त भी उपलब्ध है। ब्रह्मपुराण के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में स्वर्ग लोक से देवी गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है, इसी कारण इसे गंगा दशहरा कहा जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा पुरुषोत्तम मास में पड़ रहा है, जो और भी विशेष है।

गंगा दशहरा को लेकर मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने, गंगाजल से स्नान करने या घर पर देवी गंगा की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह भी विधान है कि जो व्यक्ति गंगा नहीं पहुंच सकते, वे घर पर ही गंगाजल से स्नान या गंगाजल का ध्यान कर स्नान व पूजन कर सकते हैं। इस दिन दान-पुण्य, ब्राह्मण भोजन और गौ सेवा का भी विशेष महत्व है।

सोमवार को सूर्योदय 5 बजकर 26 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी है, जो 25 मई की सुबह 4 बजकर 8 मिनट तक और योग वज्र सुबह 3 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

सोमवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 36 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 9 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। सोमवार को पूरे दिन रवि योग रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। इस समय किसी भी शुभ कार्य को शुरू करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अशुभ समय की बात करें तो गंगा दशहरा पर राहुकाल सुबह 7 बजकर 9 मिनट से 8 बजकर 52 मिनट तक, यमगंड सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। वहीं, गुलिक काल दोपहर 2 बजकर 1 मिनट से 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।

--आईएएनएस

एमटी/