×

मेलबर्न: 12वीं की परीक्षा में एआई का इस्तेमाल करते पकड़े गए छात्र, मिली सजा

 

मेलबर्न, 9 जून (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित एक जाने-माने स्कूल में 12वीं के छात्रों ने एआई का इस्तेमाल नकल के लिए किया। ऑस्ट्रेलिया की स्थानीय मीडिया के अनुसार इस चीटिंग में शामिल छात्रों के सजा के तौर पर नंबर काट लिए गए।

मीडिया आउटलेट द एज के अनुसार, मुलग्रेव स्थित माजेनोड कॉलेज के कई छात्रों को इंग्लिश ओरल परीक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल्स का उपयोग करते हुए पकड़ा गया। करीब 50 छात्रों ने परीक्षा के दौरान एआई की मदद ली हो सकती है। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

न्यूज डॉट काम एयू के मुताबिक, मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि जब शिक्षकों ने पाया कि उन्होंने अपनी ओरल प्रस्तुति (भाषण) तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया है तो उनके अंक में कटौती कर दी गई।

ऑस्ट्रेलिया में यह असाइनमेंट 12वीं के अंग्रेजी विषय की यूनिट-4 परीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और कुल 20 अंकों का होता है। इसमें छात्रों को अपनी पसंद के किसी सामाजिक, राजनीतिक या समसामयिक मुद्दे पर तीन से पांच मिनट का भाषण तैयार कर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करना होता है।

इस मूल्यांकन में प्राप्त अंक छात्रों के इंग्लिश स्टडी स्कोर में शामिल किए जाते हैं। यही स्कोर आगे चलकर उनकी 12वीं की अंतिम रैंकिंग, यानी ऑस्ट्रेलियन टर्शियरी एडमिशन रैंक (एटीएआर), निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एटीएआर के आधार पर ही छात्रों को विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश मिलता है।

इस वजह से परीक्षा में एआई के इस्तेमाल को गंभीर शैक्षणिक अनियमितता माना जा रहा है, क्योंकि इससे मूल्यांकन की निष्पक्षता और छात्रों की वास्तविक क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं।

माजेनोड कॉलेज के प्रिंसिपल पॉल शैनन ने एक बयान में कहा कि 12वीं की ओरल इंग्लिश परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा के दौरान कुछ छात्रों के एआई टूल्स इस्तेमाल के संकेत मिले थे। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच की गई और संबंधित छात्रों से बातचीत भी की गई।

उन्होंने बताया कि परीक्षा परिणामों को लेकर सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया और मामले की जानकारी विक्टोरियन करिकुलम एंड असेसमेंट अथॉरिटी (वीसीएए) को भी दी गई। जांच के बाद जिन छात्रों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिले, उनके अंकों में उचित कटौती की गई।

पॉल शैनन ने कहा कि स्कूलों में एआई का बढ़ता उपयोग एक नई और गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। उनके अनुसार, शैक्षणिक मूल्यांकन और परीक्षाओं में एआई आधारित सहायता का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि इससे निष्पक्षता और अकादमिक ईमानदारी प्रभावित होती है।

विक्टोरियन करिकुलम एंड असेसमेंट अथॉरिटी की गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी मूल्यांकन में जनरेटिव एआई का उपयोग अकादमिक ईमानदारी के नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों की जांच स्कूल की निर्धारित नीतियों और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं के तहत की जानी चाहिए।

--आईएएनएस

केआर/