बंगाल: दीघा जगन्नाथ मंदिर के नाम में बदलाव, अब 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' के नाम से होगी पहचान
कोलकाता, 8 जून (आईएएनएस)। पूर्वी मिदनापुर जिले के दीघा में स्थित पश्चिम बंगाल के जगन्नाथ मंदिर को अब हिंदू धर्म के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक 'धाम' नहीं माना जाएगा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को घोषणा की कि मंदिर परिसर को अब 'श्रीश्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' के नाम से जाना जाएगा।
अधिकारी ने बताया कि पुरी से भाजपा सांसद संबित पात्रा, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का पत्र लेकर एक प्रतिनिधि के तौर पर आए थे।
अधिकारी ने कहा, "ओडिशा के मुख्यमंत्री ने पुरी के सांसद संबित पात्रा को भेजा था। उन्होंने कहा कि हर कोई पूजा-पाठ चाहता है, लेकिन 'धाम' शब्द पारंपरिक संस्कृति के अनुकूल नहीं है। ओडिशा के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए, हम दीघा परिसर से 'धाम' शब्द हटा रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है और एचआईडीसीओ टेंडर तथा सरकारी फंड भी मंजूर हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, "जहां ठाकुर की पूजा होती है, उस ढांचे को मंदिर के रूप में जाना जाएगा। इसे 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' के नाम से जाना जाएगा।"
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दीघा मंदिर में पूजा भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों में बताए गए जगन्नाथ देव की पूजा के नियमों के अनुसार और सात्विक तरीके से की जाएगी। प्रसाद बांटा जाएगा और ट्रस्ट समिति की जानकारी मंदिर की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
दीघा जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी और मुख्य पुजारी राधारमण दास ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "हम माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर मुझसे चर्चा की थी और हम बहुत खुश हैं कि अब से इस मंदिर को 'दीघा जगन्नाथ मंदिर' के नाम से जाना जाएगा।"
कुछ दिन पहले, सीएम ने मायापुर में इस्कॉन मंदिर का दौरा किया था और राधारमण के साथ इस मामले पर चर्चा की थी। दीघा मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी इस्कॉन की है। पिछली तृणमूल सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने ने कहा, “मंदिर के नाम में ‘धाम’ शब्द का इस्तेमाल करना सही नहीं है। मैंने दस्तावेज देखे हैं, और इसे एक सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर बनाया गया था। पिछली सरकार ने पारंपरिक संस्कृति का जो अपमान किया था, यह सरकार वैसा नहीं करेगी।”
संबित पात्रा ने ओडिशा की आपत्ति के बारे में बताया, “सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम हैं। उनमें से एक ओडिशा में जगन्नाथ धाम है, जहां नारायण का वास है। आदि शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना की थी। इसलिए जब दीघा में मंदिर बनाया गया और उसे ‘धाम’ कहा गया, तो न केवल साढ़े चार करोड़ ओडिया लोगों को, बल्कि बंगाल के भक्तों को भी दुख पहुंचा।”
संबित पात्रा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए सीएम सुवेंदु अधिकारी का धन्यवाद किया और कहा, “नई सरकार परंपरा का सम्मान करती है।”
--आईएएनएस
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