अरविंद केजरीवाल की विभाजनकारी राजनीति पंजाब में काम नहीं आने वाली है : दलजीत सिंह चीमा
चंडीगढ़, 9 जून (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के उस एक्स पोस्ट को बेबुनियाद करार दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मौजूदा समय में ईडी हिंदू व्यापारियों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।
दलजीत सिंह चीमा ने मंगलवार को आईएएनएस से बातचीत में केजरीवाल की राजनीतिक कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने तो भ्रष्टाचार को खत्म करने के ध्येय के साथ ही राजनीति में पदार्पण किया था। लेकिन, ऐसी क्या स्थिति पैदा हो गई कि आज उनके मंत्री के यहां ही छापे पड़ने जैसी नौबत आ गई। इतना ही नहीं, हमने ऐसी स्थिति भी देखी है, जब केजरीवाल के यहां भी छापे पड़े थे। हाल ही में खरर में छापेमारी पड़ी थी, तब 22 लाख रुपए छत से नीचे फेंक दिया गया था। इसमें आम आदमी पार्टी के स्टेट अध्यक्ष का भी नाम सामने आया था। अब केजरीवाल को भी सामने आकर इस बारे में पूरी तस्वीर साफ करनी चाहिए थी। आपके विजिलेंस के यहां पर ही छापे पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में आप इसे किस धर्म से जोड़ेंगे। हर मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि क्या मनीष सिसोदिया के यहां छापेमारी नहीं हुई थी, क्या सत्येंद्र जैन के यहां छापेमारी नहीं हुई थी। यहां तक केजरीवाल के यहां पर भी छापेमारी हुई थी। मेरा केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को यही कहना है कि अगर कोई गलत काम करते हुए पकड़ा जा रहा है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अब चाहे वो हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई ही क्यों नहीं हो। चाहे वो किसी भी धर्म से जुड़ा क्यों नहीं। विभाजनकारी राजनीति पंजाब में काम नहीं आने वाली है। पंजाब की जनता इन लोगों को समझती है। आप अपने नेताओं को बचाने के लिए इस तरह के एंगल निकालोगे, तो आपको कुछ भी फायदा होने वाला नहीं है।
उन्होंने केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर केंद्र सरकार ने इन 12 सालों के दौरान कई तरह की उपलब्धियां प्राप्त की हैं, जिसमें प्रमुख रूप से सुरक्षा क्षेत्र में भारत का मजबूत होना है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि में सकारात्मक सुधार हुआ है। इस तरह की कई उपलब्धियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त किए हैं, जिसे पूरे देश ने देखा है। लेकिन, इस बीच इस बात को भी नहीं नकारा जा सकता है कि इस सरकार पर इन 12 सालों में कई तरह के आरोप भी लगे हैं, जिसमें सबसे प्रमुख है संवैधानिक संस्थाओं को दबाना।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चुनाव आयोग, केंद्रीय जांच एजेंसियां सहित अन्य एजेंसियां पर भी कई तरह के आरोप लगे हैं और यह आरोप गंभीर प्रकृति हैं। इस दिशा में बाकायदा एक रूपरेखा निर्धारित करके उसे जमीन पर उतारने की दिशा में विचार-विमर्श करना चाहिए। मौजूदा सरकार को किसानों पर भी ध्यान देना होगा। खेती किसानी एक बहुत बड़ा सेक्टर है। किसान भाई लंबे समय से एमएसपी की मांग कर रहे हैं। वहीं, बेरोजगारी एक दूसरी सबसे बड़ी समस्या है। आज की तारीख में स्थिति ऐसी बन चुकी है कि हमारे देश के युवा विदेशों में रोजगार की तलाश के लिए जा रहे हैं, लेकिन वहां पर भी उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है। अंत में यही युवा वापस लौट रहे हैं।
--आईएएनएस
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