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भीलवाड़ा : 5538 किसानों ने सरकार काे दी 36 हजार 500 किलाे अफीम, 5.11 कराेड़ भुगतान

भीलवाड़ा : 5538 किसानों ने सरकार काे दी 36 हजार 500 किलाे अफीम, 5.11 कराेड़ भुगतान

काेराेना काल में व्यापार व काम-धंधे बंद रहे लेकिन मेवाड़ में काले साेने की चमक रही। भीलवाड़ा व चित्ताैड़गढ़ जिले में इस बार माैसम अनुकूल रहने से अफीम की अच्छी पैदावार हुई है। भीलवाड़ा खंड में दाे जिलाें चित्ताैड़ व भीलवाड़ा की 6 तहसीलाें के 5538 किसानाें ने 36500 किलाे अफीम का उत्पादन किया। जिस पर उनकाे 5.11 कराेड़ रुपए मिले। इसके अलावा पाेस्त दाने से भी अच्छी आय हुई है। पाेस्त दाना वर्तमान में बाजार में 1500 रुपए प्रति किलाे मिल रहा है।जिला अफीम विभाग ने 6 तहसीलाें के करीब 5590 किसानाें काे अफीम उत्पादन के लिए पट्टे जारी किए थे। इनमें से करीब 52 किसानाें ने फसल हंकवा दी थी। माैसम अच्छा रहने से इस बार फसल में ज्यादा खराबी नहीं हाेने से उत्पादन अच्छा हुआ। उत्पादन की गई अफीम की करीब 90 प्रतिशत राशि ऑनलाइन किसानाें के खाताें में डाल दी गई। भीलवाड़ा खंड के चित्ताैड़ जिले की बेगूं, रावतभाटा व भीलवाड़ा जिले की काेटड़ी, मांडलगढ़, जहाजपुर व बिजाैलिया तहसीलाें के 5590 किसानाें काे अफीम की खेती के लिए 5, 6, 10 व 12 आरी के पट्टे दिए गए थे।इनमें से करीब 52 किसानाें ने उनकी फसल चीरा लगने से पहले अधिक खराब हाेने के कारण विभागीय निगरानी में हंकवाई गई, जबकि 5538 किसानाें द्वारा खेती की गई। पिछले दिनाें सिंगाेली में नारकाेटिक्स विभाग ने इन उत्पादकाें की अफीम का ताेल कराया, जाे करीब 36500 किलाे रहा। जिसका किसानाें काे 5 कराेड 10 लाख 97 हजार 500 रुपए का भुगतान किया गया। इसके अलावा 7 लाख 66 हजार 200 रुपए उपराेक्त तहसीलाें के मुखियाओं काे दिए गए।
सबसे अधिक 2738 किसानाें काे 10 आरी के पट्टे दिए गए, जबकि 1939 किसानाें काे 6 व 573 किसानाें काे 12 तथा 288 किसानाें काे 5 आरी के पट्टे दिए गए। इनमें से 52 किसानाें द्वारा फसल की हंकाई करवाने के बाद 5538 ने खेती की, जिससे 36500 किलाे अफीम का उत्पादन हुआ। ऐसे में एवरेज प्रति किसान करीब 10 हजार रुपए अफीम के मिल गए, जबकि पाेस्त दाना की कमाई अलग है।
जिला अफीम अधिकारी एस के सिंह का कहना हैं कि बढ़ते काेराेना संक्रमण काे लेकर सरकार द्वारा लगाए गए लाॅकडाउन के कारण व्यापार व काम धंधे बंद रहने से हर चीज का प्राॅडक्शन घटा। लाेगाें का राेजगार बंद हाे गया पर कृषि क्षेत्र ने भारतीय अर्थ व्यवस्था काे अच्छा आउटपुट दिया।

 

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