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मधुबनी : लापरवाही:मानसून की दस्तक होते ही रेनकट पता लगाने के लिए दोनों तटबंध किनारे जंगल किया जा रहा साफ

मधुबनी : लापरवाही:मानसून की दस्तक होते ही रेनकट पता लगाने के लिए दोनों तटबंध किनारे जंगल किया जा रहा साफ

बाढ़ सुरक्षा के लिए तटबंध पर दौड़ लगाने से लेकर बोरिया मिट्टी भराई और जंगल कटाई तक की काम शुरू कर दी जाती है। लेकिन नतीजा जलसंसाधन विभाग को तब पता चलता है जब तटबंध टूटता है तो गांव गांव का जिंदगी मौत के बीच पलायन करने लगता है। जान बचाने के लिए ऊंचे-ऊंचे स्थान की ओर डूबते भंसते जाते हैं। आखिर ऐसा नौबत क्यों आता है।सरकार भले ही बाढ़ पूर्व सभी तैयारी पूरी कर लेने की दावा कर लें। लेकिन सच्चाई है कि मानसून गिरने के आने पर जलसंसाधन विभाग की चहलकदमी तेज हो जाती है।

जबकि सरकार और संबंधित विभाग बाढ़ पूर्व सभी सभी तैयारी पूरा कर लेने की दावा करते हैं। फिलहाल मानसून गिरते ही विभाग ने तटबंध पर जहां जहां मिट्टी हटकर होल बन गया है। वहां मिट्टी भराई का काम चल रहा है। वहीं तटबंध में मोका ( रैनकट ) देखने के लिए जंगल झाड़ी का सफाई कार्य किया जा रहा है। जो कहीं से सफाई नहीं दिख रहा। सिर्फ खानापूर्ति के लिए छोटे छोटे जंगली पौधे को काटकर वहीं छोड़ दिया गया है। इस संबंध में अंधराठाढ़ी प्रखंड के प्रमुख शुभेशवर यादव ने कहा सफाई और मिट्टी भराई के नाम पर खानापूर्ति कर लूट का छूट दे दिया है। जिस तरह तटबंध की सफाई की जा रही है। उससे कभी भी रैनकट खोज लेना मुश्किल है। उन्होंने कहा है कि जब तक ठीक से एक-एक जंगल को हटाया नहीं जाएगा।

तब तक ये कार्य करना विभाग दिखावा है। इससे कुछ होने वाला नहीं है। यहां बता दें कि कमला नदी का जलस्तर जब बढ़ने लगती है तो दोनों तटबंध के किनारे बसे दर्जनों गांवों के लोगों के दिलों का धड़कन तेज हो जाता है। यहां के लोगों ने रौद्र रूप को झेला है। जब गांव और घर में नदी का पानी घूसना शुरू होता है तो उसे कोई बचाने वाले नहीं होते। सभी लोग पहले अपने सुरक्षा में लगे रहते हैं।उस समय पानी में जिंदगी मौत के चित्कार, क्रंदन आवाज ने पत्थर दिल को भी पिघला देता। लेकिन जाए तो कौन बचाने के लिए। जो बच गया वह अपने भाग्य के भरोसे बचता है।

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